Nari Ki Mahima Par Kavita : सृष्टि की निर्मीती-जननी है ये

सृष्टि की निर्मीती-जननी है ये, नारी शक्ति पर कविता हिंदी में

दोस्तों…,सृष्टि की निर्मीती-जननी है ये, Motivational Poem On Nari Ki Mahima Par Kavita नारी-शक्ति समर्पित कविता द्वारा यह बताना चाहती हूं कि, यह जो आधी आबादी है मतलब जैसा हमारे पुरुष भाई है वैसे ही, उनके बराबर ही दुनिया में…इस धरती पर हमारी स्त्री बहन भी है ! जैस पुरुष-पुरुष में जान होती है, भावनाये होती है वैसे ही स्त्री, महिला में भी जान होती है, भावनाये होती है, अजी ये भी तो जिंदा होती है…

कहने का मतलब इतना ही है कि ये भी हर एक क्षेत्र में समान हक की हकदार होती है…जिसे आज भी अपने छोटे-छोटे हक की भी लड़ाई लड़नी पड़ती है, समझौता करना पड़ता है…! जागरूक नागरिक की तरह हमें इस बात का ध्यान रहे कि महिलाओं को हर क्षेत्र में समान हक दिया जाए और उनका सम्मान किया जाए । Poem Nari Ki Mahima Par Kavita ये नारी-शक्ति समर्पित नारी शक्ति पर कविता हिंदी में, सृष्टि की निर्मीती-जननी है ये, नारी की महिमा पर कविता poem है ! जिसे सामाजिक संदेश के साथ नारी शक्ति को समर्पित कर रही हु!

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Poem On Nari Ki Mahima Par Kavita नारी-शक्ति समर्पित कविता

Nari shakti par kavita dvara yah batana chahti hu ki ..yah jo aadhi aabadi hai matlab jaise hamare purush Bhai hai vaise hi ..unke barabar hi duniya mai…is dharti par hamari stri bahene bhi hai….jaise male …purush mai Jan hoti hai, bhavnaye hoti hi vaise hi stri female mai bhi jaan , bhavnaye hoti hai ,aji ye bhi to jinda hoti hai…

Kahne ka tatapry itna hi ki ye bhi har ek shetra mai saman hak ki hakdaari hoti hai…..jise aaj bhi apne chote-chote hak ki bhi ladai ladni padti hai ya , compromise karna padta hai …jagruk nagrik ki tarh ham is baat ka dyaan rahe ki mahilaonko har shetra mai samaan hak diye jaye aur un ki respect ki jaye .

” सृष्टि की निर्मीती-जननी है ये, Poem On Nari Ki Mahima Par Kavita”

समानता का अधिकार मांगती…,

ये भी तो आधी आबादी है…!!

शिव-पार्वती सम…,

ये भी अर्धांगिनी है…!!(1)

वासतल्य का ये गहना है

घर की गृह लक्ष्मी ये..,

बुरी नजरों को रोक दो..,

ये भी इंसानी बस्ती है…!!(2)

कोख मे न मारो कलीयों को…

न दहेज की भेंट चढाओ…,

शरीर पर हक ऊसका है…,

जबरदस्ती हक न जताओ…!!(3)

जब चूडियों वाले ये हाथ…,

हिम्मत का गहेना पहेनेंगे…,

वध ऊन भेडियोंका निश्र्चित होगा…,

जब नारी शक्तिका एहसास होगा..!!(4)

माँ, पत्नी, बहेन या हो दोस्त

हरेक रूप मे नारी का सम्मान हो…।

समान अधिकार की हकदार है…,

सृष्टि की निर्मीती-जननी है ये…!!(5)

एसा बल दो हे माँ दुर्गा,काली,चामुंडा,

राक्षसी प्रवृत्तिओं के कलेजे काँप उठे,

सब घर मंगल सुख-संपदा फलनारी,

असूरी शक्तिओंकी तू सदा विनाशीनी हो..!! (6)

-जय माँ शक्ति,

Nari Shakti Poem In Hindi, नारी की महिमा पर कविता

Samanta ka adhikar mangti…,

ye bhi to aadhi aabadi hai…!!

shiv-parvti sam..,

ye bhi ardhangini hai….!(1)

Vastaly ka ye gahna hai

ghar ki grah laxmi ye

buri najron ko rokh do

ye bhi insaani basti hai…!(2)

Kokh mein na maaro kaliyon ko…

na dahej ki bhent chadhao…,

sharir par hak usaka hai…,

majaburan hak na jaatao…!!(3)

Jab choodiyo vaale ye haath…,

himmat ka gahana pahenenge…,

vadh un bhediyonka nishchit hoga…,

jab naari shaktika ehasaas hoga..!!(4)

Maa, patni, bahan ya ho dost

harek rup mein naari ka sammaan ho

samaan adhikaar ki hakdaar hai

srshti ki nirmiti-janani hai ye…!!(5)

Aisa bal do he maa durga, kaalee, chaamunda,

raakshasi pravrttiyon ke kaleje kaanp uthe,

sab ghar mangal sukh-sampada phalanari,

aasuri shaktiyon ki tu sada vinaashini ho..!! (6)

-jay maa shakti,

आप भी अपने विचार इस women’s नारी की महिमा पर कविता के लिए हमें comment कमेंट करके बता सकते हैं! नारी शक्ति का सम्मान सदा कायम रहे यही हम कामना करते हैं ! May god shakti always bless you to all. Thanks, friends for reading this Inspiring सृष्टि की निर्मीती-जननी है ये, Poem सृष्टि की निर्मीती-जननी है ये, Nari Ki Mahima Par Kavita Hindi.

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