Mata-Pita Par Kavita, कैसे चूकाएँगे माता-पिता का ऋण

Loving parents is the first love पहला प्यार हमें अपने माता-पिता से होता है ! क्योंकि हमें दुनिया मे लानेवाले हमारे माता-पिता ही होते है! कैसे चूकाएँगे माता-पिता का ऋण Best Poem Mata-Pita Par Kavita इस Mata-Pita Par Poem से हम माता-पिता का ऋण/कर्ज क्या होता है, वो समजने के कोशिश करते है! Author meena jain अपने भावों को / feelings को यहा प्रस्तुत करती है

Poem On Mata-Pita, माता-पिता पर कविता


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बच्चोंके रूपमे आई नई खुशियोंको माता-पिता बड़े नाजो से पालते है ! बच्चों की एक मुस्कान के लिए वो कई दर्द उठाने को भी तैयार रहते है! पर अक्सर बच्चे उनके love प्यार और care को समझ नहीं पाते और उन्हें रुला देते है ! हमारे रोने की एक आवाज पर हमारे माता-पिता भाग आते थे पर शायद हमें उन बातोंका एहसास न होने के कारण हम उन के प्रति अपनी duty भूल जाते है ! मुझे लगता है की हमारे Parents ने हमें पाल पोस के बडा करते समय अगर वीडियो Recordings की होती तो आज के बच्चे ये सवाल न पूछ सकते की आपने हमारे लिए किया ही क्या है….?????

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कैसे चूकाएँगे माता-पिता का ऋण…??
Best Poem On Mata-Pita

नींद मे भी जो हमारे लिए,

जागे-जागे रहेते थे….!

अपने सपने छोड़ हमारे,

सपने संजोते रहेते थे….!

कभी आधी रोटी खाके भी,

हमें पूरी रोटी खिलाते थे …!

पता ना चल पाए ईसलिए ,

पेटपर अपने हाथ फेर लेते थे….!

हमारी एक हँसी के खातिर,

कितने आँसू वो छिपाते थे….!

आज उनके आँसू हम भी,

कतई देख नही पाते है….!

परमात्मा से करते है प्रार्थना,

उनके आँसू हम पौंछ ना सके,

तो हमें जरूर रूला देना…..!!

पर हमारे माता-पिता की आखों मे,

आँसूकी “एक बूंद” भी ना देना….!

आँसूकी “एक बूंद” भी ना देना….!

  • धन्यवाद

Nind me bhi jo hamaare liye,

jaage-jaage rahete the….!

Apane sapane chhod hamaare,

sapane sanjote rahete the….!

Kabhi aadhi roti khaake bhi,

hamai poori roti khilaate the …!

Pata na chal pae isliye,

petapar apane haath pher lete the….!

Hamaari ek hansi ke khaatir,

kitane aansu vo chhipaate the….!

Aaj unake aansu ham bhi,

katai dekh nahi paate hai….!

Paramaatma se karate hai praarthana,

unake aansu ham paunchh na sake,

To hamai jarur rula dena…..!!

par hamaare maata-pita ki aankhon mai,

Aansooki “ek bund” bhi na dena….!

Aansooki”ek bund” bhi na dena….!

Thanks friends for reading this Poem On Mata-Pita, कैसे चूकाएँगे माता-पिता का ऋण loan. The Best Poem On Mata-Pita, Aapko kya samjha aur Mata-Pita Par Poem kaisi lagi hame comment kar jarur batana, Thanks

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