जिदगी संवारे, Jai Shree Ram Quotes On Ramcharitmanas

बिगड़ी बनादे, Jai Shree Ram Quotes For right path in life

रामायण महान ग्रंथ को हिन्दी मे अनुवाद किया, उसे रामचरितमानस के नाम से जानते है who wrote ramcharitmanas रामचरितमानस को संत कवी ‘गोस्वामी तुलसीदासजी’ ने लिखा था | रामायण का सरल हिंदी में अनुवाद करनेवाले तुलसीदास जी भारत के महान हिन्दी साहित्य के महान सन्त हो गए। उनके द्वारा रचयित रामचरितमानस से कुछ Motivational चौपाई का अर्थ quotes के रूप मे हम यहां जिदगी संवार दे, Jai Shree Ram Quotes On Ramcharitmanas इस Blog post मे अपने शब्दों में वर्णन करने का प्रयास इस राम मंदिर के अद्भूत अवसर पर कर रहे हैं|

भव्य राममंदिर निर्माण के उपलक्ष्य में हमारे कलम से अर्पित ये छोटी-सी भेंट… स्वीकार करे। हमारी best किताब “Motivation for Youth Success” Amazon “बड़े भी कभी बच्चे थे” भी आप यहाँ से पढ़ सकते है, जो parents और बच्चों-युवा के लिए बहुत ही उपयोगी होगी|

रामायण के महान मुख्य चरित्र के बारे में संक्षेप में..!

मर्यादा पुरुषोत्तम

भारत के तथा सारी दुनिया के आस्था श्री राम जी का चरित्र, महापुरुष, मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाता है। रामजी के चरित्र से राजा के परम कर्तव्य की उच्चतम सीख मिलती है। जो राजा स्वयं के सुखों के आगे प्रजा को रखते हैं, Nation First यही राष्ट्रीयता की प्रेरणा हमें उनसे मिलती है।

माता सीता सती

सीताराम की जोड़ी से पती-पत्नी के प्रेम, मर्यादा, कर्तव्य की परम सीख भी हमें मिलती है, की सती माता सीता पति के साथ वनवास पर चली गई, वह चाहती तो राज-पाट का सुख भोग सकती थी, पर जहां पती-परमेश्वर वहीं पत्नी का साथ देना उच्चतम पत्नीधर्म दर्शाता है।

भाई लक्ष्मण

भाई के प्रति अपार प्रेम का आर्दश इस कलयुग में लक्ष्मण जी के रूप में जीवित है। राम जी को वनवास मे साथ देने वाले भी लक्ष्मण आज के युग मे भाई प्रेम के लिए आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करते है |

भाई भरत

भाई के वियोग से दुःखी भरत अपने भाई के चरण पादुका शीश पर ले के घुमने वाले, ऐसे भाई का उदाहरण और किसी चरित्र में शायद ही देखने को मिले। धन्य ही एसे भाई भरत जिन्होंने राजगादी पर भाई के चरण पादुका स्थापित किए |

सेवक हनुमान जी

धन्य हो ऐसे सेवक जिनके ह्रदय में मालिक, प्रभु श्रीराम बसते हो ऐसा और कोई उदाहरण भूमि पर नहीं मिलेगा । प्रभु की आज्ञा का पालन करते हनुमान जी आज भी धरती पर लोगों के संकट हटाने का काम सदा-सर्वदा करते हैं तभी उन्हें संकटमोचन कहा जाता है। रामभक्त हनुमान जी की जय हो।

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श्री राम चरित मानस के सर्वश्रेष्ट चौपाई से Jai Shree Ram Quotes

सुमति कुमति सब..,

सुमति कुमति सब कें उर रहहीं।

नाथ पुरान निगम अस कहहीं॥

जहाँ सुमति तहँ संपति नाना।

जहाँ कुमति तहँ बिपति निदाना॥

अर्थ :- सुमति और कुमति सबके ह्रदय रहती है, जहां सुमति अच्छी बुद्धि रहती है वहां सुख-समृद्धि, संपन्नता रहती है और जहां कुबुद्धि रहती है वहां विभिन्न विपत्ति, दुःखों का वास रहता है|

बिनु सत्संग विवेक..,

बिनु सत्संग विवेक न होई।

राम कृपा बिनु सुलभ न सोई॥

सठ सुधरहिं सत्संगति पाई।

पारस परस कुघात सुहाई॥

अर्थ :- तुलसीदास कहते हैं की सत्संग के बिना विवेक की उपलब्धि नहीं होती । सत्संग मतलब अच्छे बुरे का ज्ञान। दृष्ट प्रकृति के लोग भी सत्संग से सूधर जाते हैं, उनमें भी अच्छी संगत से अच्छे गुण आ जाते हैं । जैसे पारस के स्पर्श से लोहा भी सोना बन जाता है।

जा पर कृपा राम की..,

जा पर कृपा राम की होई।

ता पर कृपा करहिं सब कोई॥

जिनके कपट, दम्भ नहिं माया।

तिनके ह्रदय बसहु रघुराया॥

अर्थ :- तुलसीदास जी कहते हैं की राम की कृपा होने से सब काम होते हैं। जिनके मन में दम्भ, कपट और माया नहीं होती, उनके ही हृदय में भगवान रामजी का निवास स्थान हो‌ जाता है।

धीरज धरम मित्र..,

धीरज धरम मित्र अरु नारी

आपद काल परखिये चारी॥

वृद्ध रोग बस जड़ धन हीना

अंध बधिर क्रोधी अति दीना॥

अर्थ :- धीरज, धर्म, मित्र और नारी इन चारोंकी परीक्षा हमारे विपत्ति के समय ही होती है, वृद्ध, रोगी, निर्धन, मूर्ख, अंधा, बहरा, क्रोधी और अंत्यन्त दिन एसे भी पति का अपमान करने से स्त्री यमलोक मे दु:ख पाती है

जासु नाम जपि..,

जासु नाम जपि सुनहु भवानी।

भव बंधन काटहिं नर ग्यानी॥

तासु दूत कि बंध तरु आवा।

प्रभु कारज लगि कपिहिं बँधावा॥

अर्थ :- शिवजी भवानी जीसे कहते हैं की, जिनके नाम से ही सारे बंधन खुल सकते थे ऐसे प्रभु के भक्त ने प्रभु रामजी के काम के लिए स्वयं को शत्रू के हाथों बंधवा दिया, यह है उत्तम प्रभु भक्ति

रघुकुल रीत सदा चली..,

रघुकुल रीत सदा चली आई

प्राण जाए पर वचन न जाई॥

सबसे प्रचलित, सव्रज्ञात दोहा

अर्थ :- रघुकुल में यह रीत सदा से चली आई है की, प्राण चले जाएं पर वचन नहीं छोड़े जाते, धन्य है इस रीत को

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जाकी रही भावना..,

जाकी रही भावना जैसी

प्रभु मूरति देखी तिन तैसी॥

अर्थ :- हमारे मन में जैसी भावना रहती है, वैसे ही हमें प्रभु के दर्शन होते हैं

होइहि सोइ जो राम ..,

होइहि सोइ जो राम रचि राखा।

को करि तर्क बढ़ावै साखा॥

अस कहि लगे जपन हरिनामा।

गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा॥

अर्थ :- तुलसीदास जी कहते हैं की वहीं होगा जो रामने रचा होगा, तर्क कोई काम नहीं आएंगे, ऐसा कह शिवजी हरी नाम जपने लगे और सतीजी चली गई राम सुख धाम

करम प्रधान बिस्व..,

करम प्रधान बिस्व करि राखा।

जो जस करइ सो तस फलु चाखा ॥

अर्थ :- भगवान ने संसार मे कर्म को ही प्रधान स्तर पर रखा है, जैसा कर्म वैसा फल, सत्कर्म का फल शांति -समृद्धि और दुष्कर्म का फल भी वैसा ही मतलब दु:ख और विपत्तिया मिलती है | वैसे ही जो कोई कर्म ही नहीं करता उसे इस धरती पे कुछ भी नहीं मिलता |

अनुबचि उचित काज ..,

अनुबचि उचित काज कछु होई,

समुजि करिय भल कह सब कोई ।

सहसा करि पाछे पछिताहीं,

कहहीं बेद बुध ते बुध नाहीं ।।

अर्थ :- कोई भी कार्य उचित या अनुचित यह जानकार ही करना चाहिए| लोग उसे ही भला कहते है बिन विचार किए हुआ काम बाद मे पछतावा ही देता है| वेद और विद्वान उसे कोई बुद्धि मानी नहीं मानते

पर हित सरिस धर्म ..,

पर हित सरिस धर्म नहि भाई ।

पर पिडा सम नहिं अधमाई ॥

नीर्नय सकल पुरान बेद कर ।

कहेउँ तात जानहिं कोबिद नर ॥

अर्थ :- दुसरों की भलाई के समान कोई धर्म नहीं और दुख पहुचने समान कोई नीचता, पाप नहीं है सारे वेद और पुरानो का सार यही है जिसे ज्ञानी लोग भली भांति जानते है |

तैो भगवानु सकल..,

तैो भगवानु सकल उर बासी ।

करीही मोहि रघुबर कै दासी ॥

जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू।

सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू॥

अर्थ :- सीता माता स्वयंवर के समय भगवान से प्रार्थना करती है की सबके ह्रदय मे निवास करने वाले है गणेश देवता मुजे रामजी की दासी अवश्य बनाएंगे | क्योंकि सच्चा स्नेह होता है तो वह उसे मिलता ही है निसंदेह..!

एहि तन कर फल..,

एहि तन कर फल बिषय न भाई ।

स्वर्गउ स्वल्प अंत दुखदाई ॥

नर तनु पाइ बिषयँ मन देहीं ।

पलटि सधुा ते सठ बिष लेहीं ॥

अर्थ – शरीर, जिवन का मतलब केवल विषय भोग नहीं होता, इस जगत के और स्वर्ग के भोग अंत मे दुख ही देते है | मनुष्य जन्म मिलने पर भी जो व्यक्ति विषयों मे मन लगाता है| वो मूर्ख सम अमृत त्याग विश पि लेता है| मन को विषयोमे आसक्त मतलब मृत्य होना है | इस दुर्लभ काया से सत्कर्म करवाने चाहिए मतलब सत्कर्म करने चाहिए |

इस चौपाई से संकट समाप्त..,

इस चौपाई से संकट समाप्त हो जाते हैं

श्री राम जय राम जय जय राम।

हरण भूत भय दशकंधर राम।

चंद्र भूज धरि विजय केरा।

खल दल दलन जय सिया राम॥

अर्थ :- हनुमान जी की कृपा से इस चौपाई को भक्ति-श्रद्धा से जपने से संकट और दुःखों का विनाश हो जाता है, सुख और शांति की प्राप्ति होती है। श्री राम चरित मानस के सर्वश्रेष्ट चौपाई से Jai Shree Ram Quotes On Ramcharitmanas यहा समाप्त करते है, धन्यवाद |

लोगों को अपने जीवन में आदर्श चरित्र बनाने में और सुखमय जीवन के लिए रामजी का चरित्र सहाय करें यही हम मंगल कामना करते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम राजा रामजी के अयोध्या मंदिर निर्माण पर सारी दुनिया, हर्षमय है । इस कलयुग में भी रामराज्य की परिकल्पना कर सकते हैं, इतने हम सभी भाग्यशाली हैं।

किसका कितना श्रेय या किसका कितना दोष ये सब छोड़के केवल राममय बने, रामजी के चरित्र से सूक्ष्मत्तम गुणों को भी हासिल कर जीवन जीएं तो जीवन सार्थक बन जाए, यही कामना। जिदगी संवार दे, Jai Shree Ram Quotes On Ramcharitmanas Blog post पढ़ने ले लिए आप सभी का तहेदील से शुक्रिया, आभार..!! राममंदिर निर्माण पर सभी देश-विदेश के भक्तों को अग्रिम शुभकामनाएं…जय जय श्रीराम ||

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