Ambe Maa ki Kavita, Maa Ambe Teri Shan Me

मा अंबे तेरी शान मे कुछ कहु, ये नादान सी गुस्ताखी होगी, पापी और दृष्टों की रूहँ, तेरे दर्शन मात्रसे ही काँपती होगी, शक्ति अंबे मां की, Ambe Maa ki Kavita: Maa Ambe Teri Shan Me Kuch Kahu.., Poem द्वारा हम आह्वान करते हैं। माता को काई नामो से हम पुकारते हैं, जैसे माता रानी, ​​काली, दुर्गा, चामुंडा, गब्बरवाली, शेरो वाली, शक्ति रूपा जगदंबा, अंबा, संतोषी मां…इन सब को शक्ति का प्रतीक माना गया है।

अम्बे माँ की भक्ति में कविता, मा अंबे तेरी शान मे कुछ कहु..!

उज्वल, पवित्र शक्ति जो दृष्टोंका नाश करती है! इस शक्ति के उपासक अपनी maa मां शक्ति के लिए 9 दिन के Navratri नवरात्रि के उपवास रखते है! मां की भक्ति में गरबा रास रचाते हैं ! पवित्रता और आध्यात्मिक एहसास के नवरात्रि की सभी को शुभकामना सहित मां शक्ति सदेव उनके भक्तों पर महेर बरसाती रहे यही कामना। शक्ति स्वरूप मा अम्बे की आराधना कर हम शक्ति की पूजा करते है ! अम्बे माँ की भक्ति में दमदार कविता: मा अंबे तेरी शान मे कुछ कहु.., इस कविता द्वारा शक्ति स्वरूप मा अम्बे की स्तुति मे ये कुछ पंक्तीया पेश है…!

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मा अंबे तेरी शान मे कुछ कहु, ये नादान सी गुस्ताखी होगी, पापी और दृष्टों की रूहँ, तेरे दर्शन मात्रसे ही काँपती होगी, अंबे मां की Ambe Maa ki Kavita
Ambe Maa ki Kavita, Maa Ambe Teri Shan Me Kuch Kahu..,

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अम्बे माँ की भक्ति में दमदार कविता: “मा अंबे तेरी शान मे कुछ कहु..,”

मा अंबे तेरी शान मे कुछ कहु…,

ये नादान सी गुस्ताखी होगी…,

पापी और दृष्टों की रूहँ …,

तेरे दर्शन मात्रसे ही काँपती होगी…!!(1)

दृष्ट, पापी तूझसे कंपित होते…,

दूरसे ही मगर तूझको भजते…,

बुद्धि के ताले तू है खोलती…,

कृपा बरसाते तू न भेदभाव करती…!!(2)

अंबा है माँ तू जगदंबा है,

शेरोवाली दूर्गा तू शक्ति रूपा है,

काली, चामुंडा तू असूर संहारणी है,

घर-घर पूजी जाती कन्या देवी स्वरूपा है..!!(3)

शक्ति दात्री है तू….,

पावनता का एहसास है…,

माँ सम रखवाली तू….,

माँ दुर्गा तेरा नाम है…!!(4)

नवरात्रि के नव रात्रि….,

बिच हमारे रूम-ज़ूमती तू…,

भक्ति-शक्ति की उपासना…,

नव-बल, सौभाग्य आपती तू…!!(5)

जय माँ अम्बे..

Ambe Maa ki Kavita, Maa ambe tere shaan mei kuchh kahu…,

ye naadaan si gustaakhi hogi…,

papi aur drshton ki ruhan…,

tere darshan matra se hi kaanmpati hogi…!!(1)

drshta, paapi tujhase kampit hote…,

door se hi magar tujhako bhajate…,

buddhi ke talel tu hai kholati…,

kripa barasate tu n bhedabhaav karti…!!(2)

amba hai maa tu jagadaamba hai,

sherovaali durga tu shakti roopa hai,

kaali, chaamunda tu asur sanhaarani hai,

ghar-ghar pooji jaati kanya devi svarupa hai..!!(3)

shakti datri hai tu….,

pavanta ka ehsaas hai…,

maa sam rakhavali tu…,

maa durga tera naam hai…!!(4)

navratri ke nav ratra..,

bich hamare rum-zumti tu…,

bhakti-shakti ki upasana…,

nav-bal, saubhagya aapti tu…!!(5)

jay maa ambe

देवी अम्बे, जिन्हें शक्ति स्वरूप, शक्ति की देवी, शक्ति की आध्यात्मिकता के रूप में जाना जाता है। मैं कामना करती हूं कि, भगवान आप सभी को हमेशा आशीर्वाद दें, मेरे दोस्तों ! आपको Ambe Maa ki Kavita: Maa Ambe Teri Shan Me Kuch Kahu.., ये कविता poem कैसी लगी हमे Comment कर जरुर बताइयेगा !आप अपने मन के भाव, माता के प्रति आपकी भक्ति यहा अपने words मे comment section मे व्यक्त कर सकते है, और आप मा शक्ति की किस प्रकार उपासना करते है हमे शेयर कर सकते है। ताकि और भक्त जनों को भी मा से जुडने का साधन मिले।

Goddess Ambe, who is known as Shakti Swarup, is the god of power, as spiritual of power. I wish that, God Always bless you, everyone, and My friends. How did you like this Ambe Maa ki Kavita: Maa Ambe Teri Shan Me Kuch Kahu.., poem? Please tell us by commenting! -Thank you, friends..,

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